Saturday, November 29, 2008

कोई पप्पू न बचे

अब तो समझ में आ गयी अपने नेताओं की औकात। जिस देश के लाखों करोड़ रुपये स्विस बैंक में सड़ रहे हैं उस देश के पास अपनी सुरक्षा पर खरचने को पैसे नहीं है। चाहे वो पुलिस हो, चाहे वो सेना हो या चाहे वो रेलवे हों, समान की खरीद में २0-२५ प्रतिशत की धांधली की बातें अक्सर सुनायी देती है। उसके बाद भी समान की गुणवत्ता की बात तो कर ही नहीं सकते। कौन किसको पकड़े- हम्माम में सभी नंगे हैं।

ऐसा क्यों हो रहा है? ऐसा हो रहा है अपने देश में पढ़े लिखे पप्पुओं की बढती संख्या के कारण। मत संख्या में २-४ प्रतिशत के फेर बदल से पुरी की पुरी सरकार बदल जाती हैं, वहीँ इस देश में मतदान न करने वाले पप्पुओं की संख्या २५ प्रतिशत से ऊपर दिखती है। इन पप्पुओं में अधिकता पढ़े लिखे और ज्यादा समझ बुझ रखने वाले भाई बहनों की है। जब तक ये पप्पू नही जागेंगे, जब तक ये पप्पू वोट डालने नहीं लगेंगे, तब तक -"PLEASE BEAR WITH US"।

चुनाव सामने है, आइये हम सब मिलकर इन पप्पुओं को मतदान केन्द्र तक ले चलें। जिस दिन यह पढ़ा लिखा वर्ग मत-दान करने लगेगा- किसी माँ के लाल में हिम्मत नहीं होगी कि ११० करोड़ आबादी वाले इस देश की और आंख उठा कर भी देख लें। एक बार इन पप्पुओं को जगाना भर होगा। आइये जागरण का नगाडा इतने जोर से बजाएं की इस बार मत-दान के बाद एक भी पप्पू न बचे हमारे हिन्दुस्थान में।

2 comments:

नारदमुनि said...

pappu pas nahi hoga. narayan,narayan

दिगम्बर नासवा said...

सोये हुवे को जगाना आसन है
पर जो जागते हुवे सोने का नाटक कर रहा है, उसे कैसे कोई जगा सकता है

पर कोशिश तो जारी रहनी ही चाहिए